मनरेगा का विस्तार किया जाना चाहिए
हाल ही में सम्पन्न हुए चुनावों के दौर में ग्रामीण संकट का निदान करने के लिए किसानों का ऋण माफ करने, नकद हस्तांतरण, न्यूनतम आय गारंटी जैसे अनेक वायदे किए गए, जिसमें मनरेगा के संशोधित स्वरूप का भी उल्लेख किया गया था। इसके अंतर्गत रोजगार के 100 दिनों को बढ़ाकर 150 दिन करने का आश्वासन दिया गया। इस योजना की शुरूआत के 15 वर्षों बाद भी इसे ग्रामीण परिवेश में तारणहार के रूप में देखा-समझा जाता है। इस संदर्भ में कुछ प्रश्न खड़े होते हैं। क्या विश्व की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना के रूप में यह अपनी सार्थकता निभा पाया है ? इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले यह जानना जरूरी है कि मनरेगा का प्रयोजन आखिर क्या रहा है ? इसकी शुरूआत समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। अधिकांश लोगों को यह अपेक्षा थी कि इस कार्यक्रम से देश की गरीब जनता में से बहुतों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया जा सकेगा। परन्तु ऐसा न हो सका। अपेक्षा की सीमा तक न सही, परन्तु महाराष्ट्र रोजगार गारंटी योजना जैसी योजनाओं का अग्रगामी बनकर मनरेगा ने अपनी सफलता के कुछ दस्तावेज तैयार कर दिए हैं। 1 . इस क...
THANKS SIR
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