| जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान 'रूस-भारत-चीन' (आरआईसी) के नेताओं के अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की प्रारंभिक टिप्पणी |
| Opening Remarks: Your Excellenciesऔर मेरे मित्र राष्ट्रपति शी और पूतिन। पिछले वर्ष अर्जेंटीना में लंबे समय के बाद हम तीन देश शिखर-स्तर पर मिले थे। विश्व के सामने प्रमुख मुद्दों पर विचारों के उपयोगी आदान-प्रदान के बाद हम भविष्य में फिर मिलने पर सहमत हुए थे। आज इस RIC अनौपचारिक शिखर बैठक में आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के रुप में विश्व की आर्थिक, राजनैतिक और सुरक्षा की स्थिति पर, हमारे बीच विचार-विनिमय महत्वपूर्ण है। हमारी आज की यह त्रिपक्षीय मुलाकात प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और समन्वय का एक उपयोगी माध्यम है। हमारे विदेश मंत्रियों की इस साल फरवरी में चीन में हुई बैठक में कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया था। इनमें counter-terrorism, international hot-spot issues, reformed multilateralism, climate change तथा RIC के तहत सहयोग को आगे बढ़ाना शामिल हैं। अब मैं His Excellency राष्ट्रपति शी से अनुरोध करता हूँ कि वे अपने opening remarks रखें। (राष्ट्रपति शी के opening remarks के बाद) धन्यवाद राष्ट्रपति शी। अब मैं, His Excellency राष्ट्रपति पूतिन से उनके opening remarks के लिए अनुरोध करता हूँ। (राष्ट्रपति पूतिन के opening remarks के बाद) धन्यवाद, राष्ट्रपति पूतिन। |
मनरेगा का विस्तार किया जाना चाहिए
हाल ही में सम्पन्न हुए चुनावों के दौर में ग्रामीण संकट का निदान करने के लिए किसानों का ऋण माफ करने, नकद हस्तांतरण, न्यूनतम आय गारंटी जैसे अनेक वायदे किए गए, जिसमें मनरेगा के संशोधित स्वरूप का भी उल्लेख किया गया था। इसके अंतर्गत रोजगार के 100 दिनों को बढ़ाकर 150 दिन करने का आश्वासन दिया गया। इस योजना की शुरूआत के 15 वर्षों बाद भी इसे ग्रामीण परिवेश में तारणहार के रूप में देखा-समझा जाता है। इस संदर्भ में कुछ प्रश्न खड़े होते हैं। क्या विश्व की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना के रूप में यह अपनी सार्थकता निभा पाया है ? इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले यह जानना जरूरी है कि मनरेगा का प्रयोजन आखिर क्या रहा है ? इसकी शुरूआत समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। अधिकांश लोगों को यह अपेक्षा थी कि इस कार्यक्रम से देश की गरीब जनता में से बहुतों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया जा सकेगा। परन्तु ऐसा न हो सका। अपेक्षा की सीमा तक न सही, परन्तु महाराष्ट्र रोजगार गारंटी योजना जैसी योजनाओं का अग्रगामी बनकर मनरेगा ने अपनी सफलता के कुछ दस्तावेज तैयार कर दिए हैं। 1 . इस क...
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